पाँव का बिछुवा

आज रूही खुश थी, क्योंकि आज रिशु उसे कुछ सरप्राइज देने वाला था, सुबह से चहकती फिर रही थी पूरे घर में, कही इधर तो कही उधर, जैसे कोई चिड़िया दाने को देख फुदकती है।।।
उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि आज उसके जीवन का एक नया पन्ना उसके दिल की किताब में लिखने वाला है कोई।।
रिशु और रूही दोनों स्कूल के समय से अच्छे दोस्त थे, इसके अलावा उनके बीच कुछ नहीं था, है रूही जरूर मन ही मन रिशु को पसंद करती थी, पर रिशु हमेशा कुछ ऐसी हरकत करता जिससे रूही के दिल को ठेस पहुँचती।।
आज भी ये बात रिशु के किसी दोस्त ने रूही को बताई, कि रिशु तुम्हारे लिए कुछ सरप्राइज प्लान कर रहा।।
वो घड़ी भी आ गई, रूही रिशु के ख्वाबों में खोई हुई थी, तभी फ़ोन की घण्टी बजी।।
रूही ने फ़ोन उठाया, उधर से रिशु बोल रहा था,"कहा है पगलिया, जल्दी से बाहर वाले पार्क में मिल, मुझे कुछ मैथ के सॉल्यूशन पूछने है।।" 

रूही उदास मन होकर वहाँ पहुँच गई, चारों तरफ देखा रिशु कही नजर नहीं आया, वो उदास वही पेड़ की ओट में मुँह लटका कर खड़ी हो गई, वहाँ पर मौजूद और भी
प्यार के जोड़ो को देखकर, उसे लगा कि वो भी यूँही साथ बैठती, बातें करती, बाहों में बाहें डालकर उससे मन की सुख दुःख बताती।।

तभी पीछे से आवाज आई, "ओ पगलिया उधर कहा इधर देख।"
रूही पहचान गई, ये रिशु की आवाज थी,
जैसे ही रूही पीछे मुड़ी तो देखा कि रिशु घुटने के बल प्रोपोज करने की मुद्रा में बैठा है,
दोनों कुछ न बोले बस एकटक एक दूसरे को देखते रहे।।
तभी रिशु ने चुप्पी तोड़ते हुए हाथ को आगे बढ़ाते हुए कहा, "अगर मुझपे विश्र्वास है तो मेरे साथ चलो।"

रूही ने उसका हाथ थामा, और फिर दोनों सुंदर झरने के नजदीक गए, जहाँ पर रिशु के दोस्त पहले से ही हाथों में  i love you लिखा हुआ बोर्ड लिए खड़े थे, एक पल के लिए रूही को लगा कि वो सपना देख रही है।।
तभी रिशु ने उसका हाथ थाम कर उसे बेंच पर बैठा दिया, और खुद घुटने पर बैठ उसको उसके पाँव आगे करने को बोला ।
बिना कुछ बोले रिशु जो भी कर रहा था, वो रूही को थोड़ा अजनबी सा लग रहा था आज, रूही को रिशु आज बदला सा लग रहा था,
फिर भी उसने उसके खातिर अपने पैर आगे रिशु की ओर बढ़ा दिए, अब तक न तो रिशु ने ये जाहिर किया कि वो उससे प्यार करता है, न ही कुछ मुँह से बोला,
क्योंकि वो शायद रूही के दिल की बात को बहुत अच्छे से जानता था  इसलिए वो ये सब करने में खुद को सहज महसूस कर रहा था।।

उसने अपनी जेब से एक डिब्बी निकाली, रूही को लगा कि पायल होगी, लेकिन रिशु ने डिब्बी खोली,
व उनमें से बिछवे  निकाल कर रूही की पाँव की उँगलियों में पहना दिए,


 एक पल के लिए तो जैसे सारी कायनात वहीं रुक गई,उस खूबसूरत लम्हे की गवाही शाम का ढ़लता सूरज व घर लौटते पंक्षी भी दे रहे थे।।

रूही इन सब से सम्भल ही पाती की सामने उसके माँ पापा खड़े थे, वो उनको देख सकपका गई,
तभी पीछे से कुछ आवाज आई,
"बहूरानी तो एकदम चाँद का टुकड़ा है, कहाँ छिपाकर रखा था तूने रिशु"
जब रूही पीछे मुड़ी तो देखा कि रिशु के माँ पापा थे।।
उसकी तो सब समझ से बाहर था,
कि ये सब क्यों हो रहा है,
"पाँव का बिछुवा, वो बिछवा जो शादी के बाद पहना जाता है"
वो उसके पाँव में है, सामने माँ पापा, पीछे कहलाने वाले सास ससुर, 
उसने सोचा क्या ये सब सबने मिलकर किया,
जी बिल्कुल सही सोचा।।
 रूही की सहेलियों को ये बात अच्छे से पता थी कि वो रिशु से कितना प्यार करती है,
और रिशु भी कहता नहीं था लेकिन दिल ही दिल में वो भी रूही को बहुत चाहता था, इसीलिए उसने सोचा कि अगर बात आगे बढ़ानी ही है तो क्यों न पहले घर वालों से ही शुरुआत की जाए।।

उसने पहले अपने घर वालों से बात की, और जब उसके माँ पापा तैयार हो गए तब उसने रूही के माँ पिता जी की अनुमति ली,
जब सब सहमत हो गए तो उसने रूही को प्रोपोज़ करने की योजना बनाई।।

आज वो पैर का बिछवा इस बात का गवाह है कि हाँ रिशु ने उसे प्यार के साथ साथ उसे पूरे दिल से अपनी पत्नी स्वीकार किया सभी परिवार जनों के सामने।।

रिशु ने कुछ इस तरह से खुद को पहले रूही के सामने इसीलिए बनाया था ताकि कल को अगर घरवाले न माने इस रिश्ते के लिए तो दोनों में से किसी को तकलीफ न हो।।
न तो पहले लगाव हुआ न ही जुदा होने का दर्द होता।।
"आज रूही अपने प्यार को पिया के रूप में पाकर व उसके घर की बहूरानी बनकर खुश है।।"
और "वो बिछुवा आज भी उसके पैरों में है जिससे उसकी जीवन की इस नई किताब की शुरुआत हुई।।"
निष्कर्ष– प्यार करते है तो करिये अच्छी बात है,
लेकिन मैरिज को लव कम अरेंज, अरेंज कम लव बनाइये, जिससे आपके घर वाले भी खुश हो आप भी खुश हो।।

Comments

  1. Awesome ❤️❤️❤️❤️❤️

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  2. Awesome...well penned maamm ...keep it up♥️

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  3. Really to much heart touching 🥰🥰❤❤

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  4. Beautifully written didi 👌👌🙌🙌🙌

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  5. Very well written Aayushi ! ❤️

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  6. Good message to society...😊

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