कलमुँही

बहूरानी खुश थी अपने नए परिवार में, सब लोग भी अच्छे से पेश आते थे अभी तक उसके साथ, उसे कोई दुख न था।। रसोई में काम करते करते अचानक उसे चक्कर आने लगे, महराजिन रसोई से ही चिल्लाते हुए बोली मालकिन मालकिन "बहूरानी के पैर भारी होवे है,
घर में लल्ला आन वालो है"।।
डॉक्टर को बुलाया और बहूरानी की जांच करवाई गई तो बात सच थी कि बहूरानी पेट से है।। सबकी खुशी का ठिकाना न था।। "सासू माँ तो बहूरानी के आगे पीछे डोलती, कही मेवे लिए, तो कहीं दूध का कटोरा लिए,
कहीं घी परोसती खाने में तो कहीं भर भर मुट्ठी केसर"।।
खुश जो थी, बहूरानी से कहती फिरती की लल्ला ही जनना।। अब बहूरानी को भी समझ आ गई कि उसकी इतनी सेवा क्यों परोसी जा रही क्योंकि सबको लल्ला की चाह थी, 
दिन बीतते चले गए, बहूरानी का पेट नजर आने लगा, "सास शाम सवेरे नजर का बंटा लिए घूमती सांझ ढ़ले मिर्ची धुंए में झोंकती, कि कही बहूरानी को नजर न लगे। कहीं मेरे लल्ला को न कोई ताड़ ले"।।
पर बहूरानी के फूटे भाग ये सुख कुछ ही दिन के उसके दामन में लिखे थे,  जच्ची की रात आ गई,
बहूरानी को अस्पताल ले जाया गया।। कुछ घन्टों के इंतज़ार के बाद मिश्राइन बाहर आई गोद में एक नन्हीं जान लिए, सास बड़ी खुश की लल्ला आया लल्ला आया, पर जैसे ही "मिश्राइन ने बोला कि बेटी जनी है, तो सास माथा पीट वही कमरे के बाहर बैठ रोना पीटना मचा दी, जैसे लगे कोई मातम का माहौल है"।।
बहूरानी को उम्मीद न थी कि पति भी सास की तरफ रहेंगे, पति ने भी बहूरानी को कोसना शुरू कर दिया।।।

 "अभागन कही की, न तो घर से दहेज़ लाई न कुछ,
सोचा था कि दहेज न सही लल्ला तो जनेगी, पर ये तो करमजली इस पाप को जन्म दे बैठी", शायद सास ये भूल रही थी कि वो भी एक औरत है कल को अगर उसके माँ बाप ने उसे न जन्मा होता तो और "ये भी भूल गई कि, ये पाप उसकी बहूरानी के अकेले से नहीं जना, कुछ अंश तो उसके बेटे का भी है इसमें", पर लड़के को कब दोष दिया समाज ने जो आज देता।।

कुछ दिन बीते बहू घर आ गयी, बहूरानी आज हैरान थी,
की जो सास कल तक हथेली में भोजन लिए उसके आगे पीछे डोलती थी आज घर आने पर उसने उससे एक निवाला भी न पूछा खाने को।। बेचारी बहूरानी घर का सारा काम करती अब तो महराजिन व बाकी काम करने वालों को भी छुट्टी दे दी सास ने क्योंकि कहती कि इस पाप की भरपाई तुझे करनी पड़ेगी।। जिस बच्चे के होने पर सास गर्भ में उसे मेवे दूध व घी की ढेर लगाती थी, आज वो बेकसूर नन्हीं सी जान, दूध की एक बूंद को तरस रही थी, बेचारी को न कोई गोद में लेता, न उसे लाड दुलार करता, सब बस दिनभर उसे कोसते, कि न जाने कौन से जन्म के पापों का फल है,
कुछ दिन पीछे बहूरानी फिर गर्भ से हुई, इस बार तो सास ने हद ही कर दी, न तो उस नन्हीं सी जान को उसकी माँ से मिलने देती न उसे कमरे से बाहर निकले देती, कहती कि तू कलमुँही है तेरा साया भी अगर पड़ा बहू के गर्भ में तो कही फिर से कलंकिनी न पैदा हो जाये।।
ऐसे कोई तांत्रिक या पंडित वैध पूजा पाठ नहीं बची रह गई, जो सास ने इस बार न कराई हो।। बस अब तो दिन रात सास यही माला जपती की लल्ला ही देना भगवान।।

दिन बीते, फिर से आँगन में  किलकारी गूँजी, भगवान का लाख लाख शुक्र है कि छोरा ही हुआ वरना इसबार तो सास बेटी के साथ साथ बहूरानी को भी जीते जी मार डालती।। लाडली भी खुश थी कि उसका भाई आया है,
जैसे ही उसने भाई को गोद लेने के लिए हाथ आगे बढ़ाया, तभी सास ने उसका हाथ झिटका और खीझतें हुए बोली कि तेरा तो मनहूस साया तक न पड़ने दूँ अपने चिराग पर, जा घर जा तू, घर जाकर लल्ला के आने की तैयारी कर।। "लल्ला के घर आने की खुशी कुछ यूं मनाई गई जैसे कोई उत्सव या अमावस की दीवाली"।। बहूरानी उदास थी, आखिर थी तो दोनों ही उसकी संताने।।
बच्चे बड़े हुए स्कूल जाने की उम्र हुई, लड़के के लिए कॉपी किताब लायी गयी, नए कपड़े नया बस्ता,
और लड़की के हाथ में थमा दिया गया कलछुरी और काला तवा, वो नादान आज तक कभी आईना नहीं देखा था उसने, 
"काम करते वक्त तवे की कालिख उसके मुंह में लग गई", फिर जब वो कुँए से पानी खींचने गई तो,
"पानी में अपनी परछाईं देखी और नादान मन ही मन यह सोच कर मुस्कुराई कि ओह्ह ये बात है, मेरा चेहरा काला है, तभी तो मेरी दादी मुझे हरदम कलमुँही कह कर बुलाती है"।।।
उद्देश्य:-  एक औरत होकर भी सास ये भूल जाती है कि कभी वो भी लड़की थी, अगर उन्हें उनके माँ बाप ने जन्म न दिया होता तो आज ये परिवार भी न होता।। 
"लोग ये क्यों भूल जाते है कि लड़के को पाने के लिए पहले लड़की ही पैदा करनी पड़ेगी, क्योंकि जब लड़की पैदा ही नहीं होगी तो लड़के कौन पैदा करेगा।।"

Comments

  1. Reality 👌🏻 nice story 🔥😘😍

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  2. ♡♡♡
    You write soo well.....keep going....

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  3. आकड़ों के अनुसार - घरेलु हिंसा में हुए औरतों पर अत्याचार की जिम्मेदार 90% औरत ही होती है



    Waise bhut bdiya likha h aapne...


    ❤️❤️❤️❤️❤️

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  4. Nice one, as always. Keep writing mam������✌��

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