मर्द को दर्द नहीं

नमस्कार🙏 दोस्तों मैं आयुषी अग्रवाल एक बार फिर से आप सभी के सामने अपने कुछ विचारों को जो की मेरे निजी जीवन से भी कुछ तथ्यों में सम्बंधित है व्यक्त करना चाहती हूं, आशा करती हूं कि पसंद आये आप सबको।।
मेरा मेरे इस लेख से किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई उद्देश्य नहीं है।। तो कृपया आप में से कोई भी इसे खुद से न जोड़े।।🙏🙏
तो आइए पढ़ते है,......


"होता नही दर्द उस इंसान को
इसीलिए मर्द वो कहलाता है
जब हो कोई भी दुष्कर्म लड़कियों के साथ,
तो वो पूरा मर्द जात बेदर्द कहलाता है,"

क्या खूब है न, कि
लड़को को बचपन से जरा से भी
आंसू बहने पर
"मर्द को दर्द नही होता" ये पाठ पढाया जाता है।।

क्यों आखिर,
क्या मर्द के सीने में दिल नहीं,
नही भाई सही है क्योंकि मर्द तो शायद पत्थर दिल होता है, है ना??
इसीलिए,
अब समझी कि क्यों सब कहते कि मर्द को दर्द नही होता,
पर मैंने तो देखा है…....
"अपने बाबा की आंखों में आंसू,
जब पहली बार मैं दीवाली के त्योहार में अपने
घर पर नही थी,
हाँ वो मुझे लेने आये दीवाली की पहली रात,
मेरे होस्टल, तब मैंने उन्हें रोता हुआ देखा है,"

"मैंने मेरे पापा को भी रोता हुआ देखा है,
जब रहती थी घर से दूर, और पापा के दिये हुए
रुपयो में से एक एक पैसे का हिसाब रखती थी मैं,
तब हाँ मेरे उस हिसाब को देख मैंने अपने पापा को रोता हुआ देखा है।"
"मेरा दोस्त मैने तो उसे भी रोते हुए देखा है,
जब आधी रातों में कभी दर्द होता था मेरे पेट में,
रहती थी मैं घर से दूर,
करती थी जब उस दर्द में आधी रातों को उसे मैं कॉल,
हाँ तब मैंने उसे रोता हुआ देखा है।।"
"मैंने मेरे भाई को भी उदास होते देखा है,
जब कभी किसी एग्जाम में उसका सेलेक्शन नहीं होता,
तो हाँ उस वक़्त मैंने उसकी आँखों में नमी को देखा है।।"
"मेरे हॉस्टल वाले भइया, मैंने मेरे लिए उनको भी परेशान होते देखा है,
याद है मुझे जब पहली बार मैं कॉलेज ट्रिप पर गई थी,
सर्द जाड़े की रात थी, अभी तक बस वापिस नहीं लौटी थी,
रात के 2 बजे मेरे कॉलेज के बाहर उन्हें मैंने चिंता से घिरे पाया था, मुझे देख सामने तब उनको चैन आया था।।"

एक और वाक्या, जो हम अक्सर कहते है की मर्दों को ये पीरियड प्रॉब्लम नहीं समझ आती,
बिल्कुल गलत मैंने तो इन सबको मेरे लिए ऐसे वक्त में भी परेशान होते देखा है, चिंता से भरे इनके दिलों के दर्द को देखा है,
नहीं होता है बर्दास्त इनसे मेरे उन दिनों के दर्द की झलक,
इनकी आंखों में मैंने उस लाचारी को पनपते भी देखा हैं, उस वक़्त के लिए कि ऐसे वक्त में ये कुछ कर नहीं सकते सिवाय मुझे तड़पता देखने के।।
फिर भी जितना इन सब से बन पड़ता है ये मेरी केअर करते है कोई डॉक्टर के पास जाता है तो मेरा ढांढ़स बंधाता है,
तो कोई मेरे हाथ को थाम अपने होने का एहसास दिलाता है,
तो कोई गूगल से नुख्से खोज मुझे उस वक़्त आराम दिलाता है,
और हाँ तो कोई ऐसे ही वक़्त मुझे अपनी गोद का सहारा दे मुझे मीठी नींद सुलाता है।।


इतना सब कुछ देखने के बाद भी कैसे मैं मान लूं कि मर्द को दर्द नहीं होता है।।
मानती हूं कि कुछ लड़के होते है ऐसे।।पर हर बार इनकी बुराइयों पर ही लिखना या बात करना, मुझे नहीं लगता की सही है।।
 

इस वाकये को पूरा पढ़ने के लिए आपका मैं तहे दिल से आभार व्यक्त करती हूँ।। अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताए।।
 धन्यवाद। 🙏🙏

Comments

  1. बहुत प्यारा लिखा है आपने दिल में सच में आपके इस लेख के लिए जगह बन गयी

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  2. This one is awesome...the way you pointed out things is just amazing...good work...write more often if possible 😊💙

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    1. Ya sure I will try.. and thanks for your valuable words...❤️❤️❤️❤️🙏🙏🙏

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  3. बहुत ही अच्छा और सुन्दर ढंग की प्रस्तुति ।

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  4. Amazing like always..

    One of the best😍😍❤️

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    1. Thank you so much for this great compliment 🙏🙏❤️❤️

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